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पशुपक्षियों पर कोरोना का प्रभाव
आज हमारा देश ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व एक ऐसी महामारी से गुजर रही है, जिसका इलाज अभी तक संभवतः नहीं मिल पाया है। जिससे सम्पूर्ण विश्व का जन-जीवन तहस नहस हो रहे हैं व सम्पूर्ण विश्व अपना संतुलन खोते जा रहा है। आदमी, आदमी से दूर रहना बेहतर समझ रहा है और किसी यात्रा से आये लोग भले ही कोरोना से संक्रमित न हो फिर भी लोग उनसे ऐसे दूरी बना रहे हैं मानों संक्रमित ही हो। यह व्यवहार कोरोना वायरस महामारी की चक्र को तोड़कर इससे बचने और समाज को संक्रमण से बचाने का बेहतर तरकीब है।
कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब लोग काफी सावधान रह रहे हैं। इस स्थिति में हम सभी को सावधानी बरतनी चाहिए, मैं आपको कोरोना से बचने और इसके चक्र को खंडित करने का उपाय बता रहा हूँ, जो कोरोना वायरस के कुछ डाक्टरों एवं विशेषज्ञों ने बताया है-
1. क्या कोरोना संक्रमित व्यक्ति के पास आने से बीमारी लग सकती है?
अगर आप किसी ग्रॉसरी स्टोर में जाते हैं जिसके मालिक को कोरोना का संक्रमण हो चुका है। इस स्थिति में आपको भी कोरोना का संक्रमण हो सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना का संक्रमण उसके द्वारा दिए गए पैसे रखने या आपके द्वारा दिए गए कार्ड को स्वैप करने के बाद लौटाने की वजह से भी हो सकता है।
2. कैसे फ़ैल सकता है कोरोना?
कोरोना के संक्रमण फैलने की चार वजह हो सकती है। आप संक्रमित व्यक्ति के पास कितनी देर रहे? आप उसके कितने पास गए? क्या उस व्यक्ति के छींकने या खांसने की वजह से आपको छींटे पड़े? आपने अपने चेहरे को कितनी बार छुआ? आपके उम्र और स्वास्थ्य की वजह से भी कोरोना के संक्रमण का असर पड़ता है।
3. छींकने या खांसने से क्या होता है?
अगर कोरोना से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उस प्रक्रिया में उसके मुंह या नाक से कुछ बूंदें गिरती हैं, इनसे कोरोना का संक्रमण हो सकता है। एक प्रोफेसर ने कहा कि कोरोना का वायरस इन बूंदों की मदद से दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है।
4. क्या आप कोरोना प्रभावित व्यक्ति की पहचान कर सकते हैं?
आप कोरोना से संक्रमित व्यक्ति की पहचान कर लें, यह जरूरी नहीं है, कोरोना से संक्रमण के लक्षण आम सर्दी-जुकाम की तरह ही होते हैं। कोविड 19 की पहचान लैब में जांच के बाद ही की जा सकती है।
5. क्या कोरोना वायरस का संक्रमण टच स्क्रीन या बस स्टॉप पर लगे खंभे से भी फ़ैल सकता है?
ऐसा हो सकता है। हांग कांग के एक बौद्ध मंदिर में पहुंचे लोगों में एक-दूसरे व्यक्ति को कोरोना का संक्रमण कुछ इसी तरह हुआ है। इस मन्दिर से लिए गए सैंपल के अनुसार बाथरूम के नल और किताब पर ढंके कपड़े में भी कोरोना वायरस के सबूत मिले हैं।
कोरोना का वायरस कहीं भी पहुंच सकता है, जब तक इसकी राह में कोई बाधा नहीं आये। जब हम छींकते हैं या खांसते हैं तो हमारे मुंह से कुछ बूंदें गिरती हैं। अगर इनकी राह में कुछ नहीं आये तो ये सीधे जमीन पर पहुंच सकती हैं। कोरोना का वायरस आपके शरीर में तभी पहुंच सकता है जब यह आपके आंख, नाक या मुंह में पहुंचे।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के संक्रमण की प्रमुख वजह खांसना या छींकना ही है। किसी व्यक्ति के बहुत करीब जाकर बात करने या साथ खाना खाने से भी कोरोना का वायरस फ़ैल सकता है।
उपर्युक्त सभी कारणों से लोग तात्कालिक आसियाना को छोड़ अपने जन्मभूमि लौट रहे हैं, लेकिन इसके साथ रह रहे पशु-पक्षी, जो इनके रोजमर्रा के जीवन से अपना जीवन-यापन करता था वह अब जस के तस पड़े हैं। इन्हें कोई न तो खाना देने को रुक रहे हैं न पानी देने को।
आखिर जानवरों में भी एक जान होते है, जिन्हें हमारी तरह भूख-प्यास लगती है तथा वे भी प्यार के भूखे होते हैं।

भारत एक धर्म प्रधान देश है। जहाँ हर 5 से 10 किलोमीटर पर एक भव्य मंदिर एवं अन्य तीर्थस्थल है जिसपर मानुष्य के साथ साथ पशु-पक्षी भी आश्रित हैं। जैसे- मंदिरों के इर्द-गिर्द भिखारी, बन्दर, कुत्ता, गौरैया, तोता, कबूतर अन्य पशु-पक्षी जो सिर्फ इन्हीं स्थलों पर निर्भर हैं। जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से भारत सरकार एवं राज्य सरकारों ने कुछ हफ्तों के लिए बंद कर दिया है। इस बंदी का मुख्य उद्देश्य सम्पूर्ण भारत को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाना है, जिसका समर्थन भारत के नागरिक कर रहे हैं। वहीँ जानवरों की स्थिति अच्छी नहीं दिख रही, इस तेज धुप में इन्हें न पानी, न अन्न का दाना मिल पा रहा है। इस स्थिति में पशु-पक्षी अपना प्राण त्याग रहा है जिसका परिणाम पर्यावरण का असंतुलन होना लाजमी है, क्योंकि हमें कुछ दिनों बाद पर्यावरण का और अधिक बिगरता हुआ रूप नज़र आएगा।

भारत एक धर्म प्रधान देश है। जहाँ हर 5 से 10 किलोमीटर पर एक भव्य मंदिर एवं अन्य तीर्थस्थल है जिसपर मानुष्य के साथ साथ पशु-पक्षी भी आश्रित हैं। जैसे- मंदिरों के इर्द-गिर्द भिखारी, बन्दर, कुत्ता, गौरैया, तोता, कबूतर अन्य पशु-पक्षी जो सिर्फ इन्हीं स्थलों पर निर्भर हैं। जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से भारत सरकार एवं राज्य सरकारों ने कुछ हफ्तों के लिए बंद कर दिया है। इस बंदी का मुख्य उद्देश्य सम्पूर्ण भारत को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाना है, जिसका समर्थन भारत के नागरिक कर रहे हैं। वहीँ जानवरों की स्थिति अच्छी नहीं दिख रही, इस तेज धुप में इन्हें न पानी, न अन्न का दाना मिल पा रहा है। इस स्थिति में पशु-पक्षी अपना प्राण त्याग रहा है जिसका परिणाम पर्यावरण का असंतुलन होना लाजमी है, क्योंकि हमें कुछ दिनों बाद पर्यावरण का और अधिक बिगरता हुआ रूप नज़र आएगा।
जीवनचक्र के अनुसार सभी जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधें एक दूसरे पर निर्भर है। जिस प्रकार बढ़ती हुई आबादी और प्रदूषण से सबसे ज्यादा नुकसान जंगलों को हुआ है। पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने के कारण धरती से जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं,जबकि कुछ विलुप्त होने की कगार पर खड़ी हैं। भारत से गौरैया,डाल्फिन,गिद्ध, मैना और कौए के भी प्रजाति विलुप्त होती जा रही है। इन पक्षियों के विलुप्त होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे है। हमारी आधुनिकता का सबसे बुरा असर जंगल और जीव-जंतुओं पर ही पड़ा है। लेकिन पर्यावरण के साथ ही इंसान के जीवन चक्र का संतुलन भी इन्ही जीव-जंतुओं से बना रहता है। हमारे आस-पास मौजूद खतरनाक कीड़ों का खाकर यही जीव-जंतु जीवन की रक्षा करते हैं। जबकि फसलों की सुरक्षा में सारस की बड़ी भूमिका होती है। मौजूदा वक्त में प्रकृति के बिगड़े हुए संतुलन से इंसान के जीवन पर भी खतरे की घंटी बज रही है।
कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए एवं लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार ने कुछ हफ्तों तक सभी विश्वविद्यालयों, सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों को बंद करा दिया, कुछ स्कूलों के वर्ग 1 से 8 तक के सभी छात्र-छात्राओं को सीधे बिना किसी परीक्षा के वर्ग उत्तीर्ण करने का आदेश दे दिया। इस स्थिति में जो छात्र-छात्रा अन्य राज्यों में रहकर पढाई कर रहा है और इस स्थिति में जहाँ सरकार ने छुट्टी देकर सीधा घर जाने को कहा जो सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहतर है, लेकिन वही छात्र-छात्रा घर पहुंचते हैं तो घरवाले और समाज संदेह की निगाह से देखते हैं। बड़े मशकत के बाद घर प्रवेश की इजाजत दी जाती है। वहीँ लोग खुद को पालतू जानवरों से दूरी बनाकर रख रहे हैं जो आगे चलकर एक नया बीमारी व महामारी की वजह बन सकती है। वर्तमान समय कोरोना वायरस के कारण भारत आपातकाल से गुजर रहा है। जिसमें हम मनुष्य अपने-अपने सुरक्षा की दृष्टिकोण से जहाँ अपने-अपने आशियानें में बंद हैं, वहीँ हमारे साथ-साथ चलने व जीवन यापन करने वाले सामाजिक प्राणियों अर्थात पालतू जानवरों की स्थितियाँ भोजन न मिलाने के कारण बेहद नाजुक होती जा रही है।
आपातकाल में जिन पालतू जानवरों को अपना मालिक है उसका स्थिति तो ठीक-ठाक है लेकिन जो जानवर फुट-पात पर रहने वाले मनुष्यों पर निर्भर है। उनके प्रति हम लोगों को संवेदनशील बनाने की जरूरत है। मैं आप सभी से निवेदन करता हूँ कि अपने परिवार में बनने वाले खाद्य सामग्री की मात्रा को धोड़ी बढा दे और परिवार के सभी लोगों के खाने के बाद बचा हुआ खाना अपने घर के बहार या सड़क के किनारे रख दें। जिससे हमारे आसपास के सभी पशु-पक्षी खाकर अपने प्राणों की भी रक्षा कर सकें।
आपातकाल में जिन पालतू जानवरों को अपना मालिक है उसका स्थिति तो ठीक-ठाक है लेकिन जो जानवर फुट-पात पर रहने वाले मनुष्यों पर निर्भर है। उनके प्रति हम लोगों को संवेदनशील बनाने की जरूरत है। मैं आप सभी से निवेदन करता हूँ कि अपने परिवार में बनने वाले खाद्य सामग्री की मात्रा को धोड़ी बढा दे और परिवार के सभी लोगों के खाने के बाद बचा हुआ खाना अपने घर के बहार या सड़क के किनारे रख दें। जिससे हमारे आसपास के सभी पशु-पक्षी खाकर अपने प्राणों की भी रक्षा कर सकें।
धन्यवाद🙏






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